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महाराष्ट्र: दामाद को सरप्राइज में दी जानी थी सोने की अंगूठी लेकिन उसे खा गई बिल्ली, मल करते समय भी नहीं निकली तो...

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Jun 09, 2026 11:28 pm IST,  Updated : Jun 09, 2026 11:28 pm IST

महाराष्ट्र के बीड में एक दामाद के लिए सरप्राइज रखा गया था और उसे सोने की अंगूठी दी जाने वाली थी। ये अंगूठी दामाद तक पहुंच पाती, उससे पहले इसे बिल्ली ने निगल लिया।

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बिल्ली ने खा ली सोने की अंगूठी Image Source : INDIA TV

बीड: महाराष्ट्र के बीड जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दामाद को उसके ससुर सरप्राइज में सोने की अंगूठी देना चाहते थे इसलिए उन्होंने सोने की अंगूठी को धोंडे (आटे के गोले) में छिपा दिया लेकिन इस आटे के गोले को बिल्ली ने खा लिया, जिससे सोने की अंगूठी भी उसके पेट में पहुंच गई।

कैसे वापस मिली अंगूठी?

सोने की अंगूठी बिल्ली के पेट में होने की खबर सुनकर परिजनों ने बिल्ली को घर में ही बांध दिया और ये इंतजार करने लगे कि बिल्ली जब मल त्याग करेगी तो अंगूठी बाहर आ जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद कई दिन बीत गए लेकिन अंगूठी बिल्ली के पेट से बाहर नहीं आई।

इसके बाद बिल्ली को पशु चिकित्सक के पास ले जाया गया। उल्टी करवाने के लिए दवाएं भी दी गईं, लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। दुर्भाग्यवश उपचार के दौरान बिल्ली की मौत हो गई। इसके बाद मृत बिल्ली के पेट की शल्यक्रिया की गई और आखिरकार वह सोने की अंगूठी बरामद कर ली गई, जो पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई थी।

क्यों सोने की अंगूठी दामाद को देना चाहते थे ससुर?

अधिक मास श्रद्धा, परंपरा और दामाद के सम्मान का महीना माना जाता है। इस दौरान दामाद को ससुराल में विशेष निमंत्रण दिया जाता है, उसकी विधिवत पूजा की जाती है और दान देने की परंपरा निभाई जाती है। सोने की अंगूठी, कोई कीमती वस्तु, भूमि दान या गोदान—अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दामाद को भेंट दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह में किया गया दान विशेष पुण्य प्रदान करता है। इसी परंपरा का सम्मान करते हुए बीड के एक परिवार ने दामाद को सोने की अंगूठी देने का निर्णय लिया था, लेकिन इसके बाद जो घटनाएं घटीं, उन्होंने इस उपहार की कहानी को पूरे जिले में चर्चा का विषय बना दिया।

बता दें कि तीन साल में एक बार आने वाले अधिक मास में दामाद को घर बुलाकर विशेष भोजन और उपहार देने की परंपरा आज भी कई जगहों पर निभाई जाती है। हालांकि अब इन उपहारों का स्वरूप बदलता नजर आ रहा है। दामाद को सोने की अंगूठियां, आभूषण और अन्य महंगी वस्तुएं भेंट की जा रही हैं। इसे लेकर अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने सवाल उठाए हैं। समिति का कहना है कि परंपरा निभाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन सोने जैसे महंगे उपहारों के कारण बेटी के पिता पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। परंपरा और सामाजिक वास्तविकता के बीच संतुलन को लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है। (रिपोर्ट- आमिर हुसैन)

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